्हाल कुछ ऐसा बनाऐ बेळॆ है,
आंखो की श्रारत पर उळ्ने वाले खंजर,
अब तेरी बेदीली पर खामोश रहते है.
कल तलक चश्मा_ए_जाम थे जीन लोगो के,
आज वही जानीब_ए_लोग दीवाना कहे देते है.
तेरे ईश्क मै बद्नाम होकर तुझे ना पा सके,
तो ऐसा जखम पा कर मर सकेगा कोई.
अब तो जीन्दा रहुंगा बस तेरा नाम लेकर,

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